खुशी, सब के लिए..

❀सु❀ ❀प्र❀ ❀भा❀ ❀त❀

हमारी खुशी का पैमाना क्या है, हरेक के लिए अलग नहीं होता है, लेकिन हम ज्यादातर यही मानते है। गलत मान्यता है कि पैसा खुशी का मुख्य कारण है, यह भी गलत है की हराभरा परिवार खुशी दे सकता है। अच्छा केरीयर या घुमना फिरना भी सच्ची खुशी का पैमाना कभी नहीं हो सकता। हमारे शाश्त्रों ने बहुत विस्तार से समझाया है कि हमारी खुशी के लिए सेहत के अलावा कुछ भी जरूरी नहीं है। अच्छी सेहत के लिए चार बातें जरूरी है। पहला सुख, स्वयं स्वस्थ, के लिए ऐक, दो, तीन ओर चार चरण है। पहला चरण खाना जो स्वास्थ्य संबंधी मामलों से जुड़ा हो। दुसरा है, व्यायाम समय, उम्र और शरीर की स्थिति के अनुसार करना है। तीसरी बात है, निंद्रा जो तन को प्रफुल्लित रखें। आखरी पर महत्वपूर्ण है खाली समय, जो हम भूल चुके है। खाली समय कैवल खुद के लिए, खुद के शौक के लिए या बीना कीसी मतलब की बातचीत, चौपाल चर्चा। ईस बातों पर ध्यान दें और खुशी के सागर में झुले….. जय श्री कृष्ण

▂ ▅ आपका दिन मंगलमय हो ▅ ▂ ՏɧԹɿʅeՏՏɧ ρԹԵeʅ, ԹՌԹՌԺ

समाधान

◉✿🆂🆄🅿🆁🅰🅱🅷🅰🆃 ✿◉

समस्या, विवाद सभी के साथ होता रहता है। छोटी छोटी बातों में विवाद हो जाना आम है, कोई ईसे हल्के में लेता है तो कोई ईसे अहम के साथ जोडऩे हुए बडा स्वरूप दे देते है। कभीकभी यह बात न्यायालय तक पहुंच जाती है। लेकिन सही मायने में समस्या आने पर न्याय नहीं समाधान होना चाहियें क्योकि, न्याय में एक के घर में दीप जलते है, और दुसरे के घर अँधेरा होता है। न्याय ऐक को मीलता है तो दुसरे को अपने आप अन्याय लगता है। मगर समाधान में दोनों के घर दीप जलते है, क्योंकि कोई स्थान पर अन्याय नहीं होता। जीवन में सदा सर्वदा समाधान की सोचें, सही न्याय यहीं है……. जय श्री कृष्ण

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शुध्द भावना

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जीव मात्र के प्रति सद्भाव रखने से बहुत से कार्य ऐसे ही सफल होतें है। सबका कल्याण हो यही भावना सत्य और सत्कार्य है। अनेक में एक का दर्शन करना ही सबसे उत्तम है, सभी में ईश्वर भाव रखें। सब में समभाव रखना ही सबसे उत्तम धर्म है। सद्भाव का अर्थ है ईश्वर का भाव। सबमे जो ईश्वर का भाव रखता है वही सुखी होता है। किसी भी जीव में कुभाव रखने वाले का धर्म सफल नहीं होता। सबके प्रति शुद्ध भाव और सद्भाव रखो। शुद्ध भाव रखना ही सबसे बड़ा तप है। सद्भाव के बिना किया हुआ कोई भी सत्कर्म कभी सफल नहीं होता…..जय श्री कृष्ण

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अनदेखा

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जीवन भी क्रिकेट की तरह अनिश्र्तितता का खेल है। क्रिकेट में कभी कभी कोई असामाजिक तत्व खेल पर हावी होने कि कोशिश करते है और काफी हद तक सफल भी होते है। हमारी नजरों के सामने सारा खेल बदल जाता है। हम ऐसे मामले को नजरअंदाज कर देते है। जीवन में भी ऐसा ही है, बहुत सारे लोग अपनी ओर से कोशिश करते रहते है कि हमारा जीवन पथ कंकड़ पत्थर से भरा रहे। कुछ लोग अपने फायदे के लिए, कुछ अपने अहम के लिए तो कुछ अन्जाने मे लेकिन हमारे जीवन की सुचारु व्यवस्था को छिन्नभिन्न करने में सफल होते है। जैसे हम जानते हुए भी क्रिकेट मेच का मजा लेते है, सटोरियों को अनदेखा करते हुए भी अपने आप को मस्त रखते है, ऐसे ही जीवन के कंकड़ पत्थर को भी अनदेखा करते हुए अपने आप को मस्त रख्खे, स्वस्थ रखें…..जय श्री कृष्ण

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देश पहले या वोट..

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हम सब अपने आप को भारतीय समझते है, लेकिन कुछ लोग भारत का, भारत की सेना या भारत की सरकार पर बडे अतार्किक सवाल उठाते है। समझ से परे है, लेकिन सच्चाई है, राजनीति में सबकुछ जायज है। हमें सवाल उठाना चाहिए कि “सरकार के विरोध में भी देशहित का ध्यान क्यों न रखा जाएं ?” बहुत सारी चीजें या धटनाओं पर जैसी सियासत की जा रही है वह हमें जापान की याद दिलाती है, क्योंकि वहां उसे राष्ट्रद्रोह माना जाता है और बहुत कम मात्रा में बचाव का मौका दिया जाता है। क्या हमें ऐसी स्थिति अपने देश में हो ऐसी मुहिम नहीं चलानी चाहिए ? अगर हम मे से ज्यादातर लोगों ने ईस मुहिम को चलाया तो हमारी आज की सरकार ईसे पुरा करने के लिए सक्षम है…..जय श्री कृष्ण

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क्या मिथ्या है…

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बाबा लोग आपको उपदेश देते हैं संसार मिथ्या है, भगवान् सत्य है, यह कीतना सत्य है ? इस संसार में क्या है ? एक तो जीव है मनुष्य, पशु-पक्षी, वृक्ष, ये सब जीव हैं, दुसरा स्थुल पदार्थ है। ईसमें मिथ्या क्या है, सब मोजूद हैं, ये सब तो मिथ्या नहीं। सब अनुभव में आ रहा है, देखने में आ रहा है, भगवान् है उसको कैसे मिथ्या कहें ? तो ये तीन के मिक्स्चर का नाम तो संसार है। भगवान् ने संकल्प किया, संसार बन गया, नया बना? नहीं नहीं वो जैसे पहले था- वेद कहता है जैसा संसार प्रलय के पहले था वैसा ही संसार भगवान् ने प्रकट कर दिया। संसार मिथ्या नहीं है, एक मिट्टी है, मिट्टी से सुराही बनती है। मिट्टी ही सुराही बन गई। अब मिट्टी और सुराही में क्या अन्तर है ? लेकिन एक अन्तर है, मिट्टी नश्वर नहीं है, सदा मिट्टी रहेगी लेकिन सुराही फूटेगी। एक दिन टूटेगी और फिर वो मिट्टी बन जायगी। तो मिट्टी हुआ कारण, सुराही हुआ कार्य। तो कार्य नश्वर होता है, कारण नित्य होता है। तो भगवान् है कारण और सृष्टि है कार्य। भगवान् है नित्य और सृष्टि है अनित्य, मिथ्या तो नहीं कह सकते…..जय श्री कृष्ण

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षड्यंत्र

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देश के साथ गद्दारी का एक मामला पढने मे आया जो आपके साथ बांटना चाहता हूं। देश के कुछ खास राज्यों में जानबूझकर खास लोगों को कक्षा बारहवीं ओर कोलेज कि परिक्षाओं मे बहुत ज्यादा गुणों से उर्त्तीण कराया जा रहा है। ताकि ऐसे विध्यार्थी खास, पसंदीदा युनिवर्सिटी मे आसानी से अपना दाखिला लेने में सफल हो जाए। ऐसे विध्यार्थी देश को तोडऩे का ओर बदनाम करने के सिवाय उच्च पद भी नियुक्त हो सके। आगे चलकर ऐसे लोग अपनी मनमर्जी से देश को चला सके। सोचें, कीतनी घीनौनी चाल है, ईस चाल मे कुछ राजनितिज्ञों का भी हाथ होगा, जो हम भारतीयों की पीठ पर कीतना कठोरतम प्रहार करते है या करना चाहते है। हमें सजग रहना पडेगा, ऐसे लोग को पहचानना होगा ओर ईसकी जानकारी सच्चे देशभक्त को करनी होगी…..जय श्री कृष्ण

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दुरियां, नजदीकियां

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लोगों की जान पहचान टेक्नोलॉजी के साथ साथ बढती जा रही है। सतकों पहले नजदीक रहने वाले से ही पहचान थी, आवाजाही के साधन बढाने के साथ साथ मुलाकातों मे बढोत्तरी हुई। डीजीटल क्रांति के साथ ईमेल, फोन ओर ईन्टरनेट के द्वारा नजदीकियां ओर बढ गई। सोशल मीडिया के आविस्कार के बाद तो मान न मान, में तेरा महेमान जैसी स्थिति पैदा हो गई। अभी भी टेक्नोलॉजी रुकीं नहीं है, वर्चूली या 3D के माध्यम से हम ओर नजदीकियां, ओर सहवास के अनुभव कि और अग्रसर हो रहे हैं। ईस बदलाव की दौड़ में एक बहुत जरूरी बात बहुत पीछे छूट चुकी है, जो सतकों पहले हमारे आपसी तालमेल को जोडें रखती थी वह बात है आत्मियता, भाईचारा ओर सहयोग जो बंट गया। अलग शब्दों में कहे तो अंतर कि दुरिया नजदीकियां मे तब्दील हो गई लेकिन आत्मीय नजदीकियां न जानें कैसे दुरियां मे बदल गई…..जय श्री कृष्ण

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थम्सअप

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सोशल मीडिया के जमाने में हम बारबार, हर दिन कीसी भी बात, फोटोज या विडिओ पर थम्सअप या लाईक्स देते रहते है। कभी गौर किया है कि इस प्रकार की प्रतिक्रिया दुसरों पर क्या असर डालेंगी। नहीं, कभी नहीं सोचा, फेसबुक पर लाईक्स का सरल टेब आता है तो बीना देखें दबा दिया!!! हमारा एक लाईक जापानियों के लिए पांच बनता है, क्रिस्टियनो के लिए अच्छा तो खुराफानीओं के लिए एक बन जाता है। पढें लीखें लोगों के लिए आल ईज वेल, भारतीयों के लिए ठेंगा मतलब निरास करना या किसी कार्य को करने के लिए मना करना। हम कीसे लाईक देते है और उसका वो क्या मतलब निकालेगा या निकालेगी यह उसकी भौगोलिक स्थिति पर निर्भर है। लेकिन हमें क्या, हम तो फेसबुक बताएगा वहीं अनुकरण करेंगे, हमारे पास ज्यादा प्रर्याय नहीं है ऐसा नहीं है, बहुत से प्रर्याय है लेकिन हम वहीं अपनाएंगे जो सरल है, सोटकर्ट कि आदत से मजबूर है। सरल रास्ता सदैव लाभकारी नहीं होता…..जय श्री कृष्ण

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मुडस्वींग..

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हमारी मानसिक स्थिति में उतार चढाव या हमारे विचारों में समय समय पर बदलाव आता रहता है। कभी हम सकारात्मक तो कभी नकारात्मक विचारों से झुझते रहते है। कभी सोचा है कि हमारे विचारों में मुडस्वींग क्यों आते रहता है। हमारे विचार हालात से जुड़े हुए ही होते हैं, अर्थात जैसे हालात होते हैं, उसी आधार पर ही हमारे विचारों की दिशा होती है, और हालात के बदलते ही हमारे विचार भी बदल जाते हैं। दरअसल हमारी पूरी कोशिश यही होनी चाहिए कि हालात चाहे जैसे हों, उनसे हमारे विचारों में कोई बदलाव नहीं आना चाहिए। हमारे विचार सकारात्मक या सदा ऊपर उठे हुए ही होने चाहिए, तभी हमारी मानसिक स्थिति सदा एक रस या एक समान रह सकेगी…..जय श्री कृष्ण

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