साफसफाई

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एक बार ध्यान से सोचें, कितनी चीजें हैं, जिसकी मुझे जरूरत नहीं। बहुत सारी चीजें जीसे हम खरीद कर भूल चुके है। सभी उपलब्ध चीजों की एक लीस्ट बनाएं, लंबी फेहरिस्त पाएंगे, ईस लीस्ट से जो चीजों का प्रयोग करते हो उसे लीस्ट से मीटादें, बाकी बचीं आईटमों मे से आनेवाले थोड़े समय में जीसे प्रयोग करने वाले हो उसे भी मीटाएं। बाकी रही चीजों को तत्काल प्रभाव से कीसी को भेंट कर सकते है। बांटने वाली फिलींग्स खुशी से भर देंगी। हमारे पास जरूरी सामान रहेगा और जीसको जरूरत है उसे भी आनंद मीलेगा, दोनों खुशी से भरपूर फायदा उठाकर जीएंगे…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

काम में खुशी ढुंढे

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खुशी हमारा मूलभूत गुण है, आत्मा का संस्कार है। हम सब खुशी पाने के लिए बेताब हैं लेकिन सफल नहीं हो रहे है। अचरज कि बात है, ईसके भी कुछ कारण है, जीससे खुशहाली हमसे दूर दूर होती जाती है। ख़ुशी पाने का मतलब है अच्छा करना और काम करना, न कि अंदाज़े लगाना और आलसी होना। आलस्य भले ही बहुत लुभावना लगे, लेकिन केवल काम ही सच्ची संतुष्टि दे सकता है। अगर हम अपने पसंदीदा शौक को अपने अर्थोपार्जन मे लगाने में सफल हो सकते है तो खुशी हमारे साथ सदैव रहेगी। अक्सर हम ऐसा नहीं कर पाते है क्योंकि हमने उस पर कभी विचार किया ही नहीं कि हमें क्या पसंद है, हम तो दुसरों का अनुकरण करते हुए जी रहे है…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

मैं

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हमारे व्यवहार में ही अहंकार को प्रदर्शित करने की क्षमता छिपी होती है, जिससे प्रायः हम इंसान अनभिज्ञ रहतें है, इसके विपरीत जब हभ अपने आसपास जितना खुशनुमा माहौल की रचना करने की क्षमता रखतें है, वास्तव में तभी हम शक्तिशाली और बुद्धिमान कहलाने का अधिकारी हो सकतें है, अन्यथा जीवन भर हम सिर्फ अपने अहंकार को ही पोषण देतें रह जातें है। अहम बहुत सुक्ष्म है, अपने हर व्यवहार में कसौटी पर रखें, जरासा भी शक हो तो सावधान हो जाएं…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

भगत ओर भक्त

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भगत ओर भक्त, ऐसे तो सामान्य तौर से एक जैसे ही लगते है, शायद पर्यायवादी भी कोई कह सकता है लेकिन यह सच्चाई नहीं है। ईसके सही अर्थ तो एक दुसरे को कौसों दूर करने में आमादा है। भगत का अर्थ है, अनुयायी, कीसी की पूंछ पकडकर चलनेवाला। भक्त का अर्थ है कीसके साथ लीन हो गया है, कीसीको अपना बना चुका है। ईस दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका है, कीसी के लिए कुछ करने की, भगत उंगली पकडकर चलता है, जो कहें वहीं आज्ञा मानता है तो भक्त सम्पूर्ण समर्पित हो जाने का राह चुनता है। अब एक मानने की गलती कभी नहीं करना…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

कुदरत

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ईश्वर को मानें या नहीं मानें, स्वर्ग नर्क कि मान्यता से परें रहे लेकिन इतना जरूर मानें कि ये सृष्टि एक सुदृढ़ व्यवस्था से संचालित है। इस व्यवस्था में शामिल प्रत्येक जीव कर्म के बंधन से बंधा है। यह कर्म ही उसकी सद्गति- दुर्गति के कारक होते हैं। जिसे हम ईश्वर, कुदरत या किसी भी नाम से जानते हैं, उस शक्ति ने अगर हमसे सब-कुछ छिनकर भी जिंदा रखा है, हमें कर्म करने के योग्य रखा है तो इसका मतलब कि उसने हमें एक मौका दिया है। वह सबकुछ हासिल करने का एक मौका, जिसे उसने ही हमसे छीन लिया था…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

स्वार्थवश

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कबीर उवाच..
स्वारथ कूँ स्वारथ मिले, पडि़-पडि़ लूंबा बूंब। निस्प्रेही निरधार को, कोय न राखै झूंब॥

स्वार्थ से स्वार्थ मीलता है तो क्या होता है, कैसी तरकीब अपनाईं जाती है उसका बखूबी ओर बहुत कम शब्दों में बयान किया है। कई स्वार्थी लोग जब आपस में मिलते हैं तो एक-दूसरे की खूब प्रशंसा करते हैं, एक-दूसरे को खूब खुश करने की कोशिश करते हैं; लेकिन जो व्यक्ति निष्काम और निस्स्वार्थ होते हैं, लोग शब्दों से भी उसका आदर नहीं करते, ऐसी ही चाल है हमारे समाज का…..जय श्री कृष्ण

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अहंकारी

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पंचदोषों कि बात करते है तो ईसमें सबसे प्रमुख, खतरनाक ओर अप्रत्याशित है अहंकार। यह इतना छुपा ओर महिन होता है कि खुद को महसूस भी नहीं होता है। लेकिन हमारे व्यवहार में ही अहंकार को प्रदर्शित करने की क्षमता छिपी होती है। जिससे प्रायः हम अनभिज्ञ रहतें है, इसके विपरीत जो अपने आसपास जितना खुशनुमा माहौल की रचना करने की क्षमता रखता है, वास्तव में वही इंसान शक्तिशाली और बुद्धिमान कहलाने का अधिकारी हो सकता है, अन्यथा जीवन भर इंसान सिर्फ अपने अहंकार को ही पोषण देता रह जाता है…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

खुशहाली

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खुशी का महत्व कीतना है यह समझना है तो कुछ महसूस करना होगा। जब हमारी खुशी का पैमाना बढ़ा हुआ होता है, तब जीवन मे आने वाली हर बड़ी नकारात्मक बातें या व्यवहार को भी हम नज़र अंदाज़ कर पार कर लेते हैं, लेकिन जब खुशी का पैमाना कम हो तो हर छोटी नकारात्मक बात या व्यवहार हमारे लिए बहुत बड़ी हो जाती है, अतः स्पष्ट है, कि जीवन मे आने वाली नकरात्मकता उतना महत्व नही रखती जितना महत्व हमारी खुशी के पैमाने का होता है। सदैव चहरे पर मुश्कान हो, मन आनंदित हो ओर विचारों में सकारात्मकता हो…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

ईच्छाओं कि उत्पत्ति

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पहाड़ो पर नदियों को तो नहीं देखा जा सकता मगर सुना जाता है। आगे बढ़ने पर थोड़ा-सा पानी सोते की भाँति झिर-झिर बहता हुआ दिखता है और आगे बढ़ने पर इसी की हम एक पतली धार पाते हैं। यही पतली धार कुछ और आगे बढ़कर और कई एक-दूसरे पहाड़ी सोतों से मिलकर एक छोटी नदी बन जाती है। कहीं पत्थर की चट्टानों से टकरा कर छींटे उड़ाती है। फिर बड़ी नदी बनती है और बड़े वेग से समुद्र की ओर बहती है। हमारी चाहों का भी यही ढंग है, पहले जी में इसका कुछ चिह्न नहीं होता। बाद मे धीरे-धीरे उसकी एक झलक-सी इसमें दिखलाई देती है। कुछ दिन और बीतने पर उसकी एक धार-सी भीतर-ही-भीतर फूटने लगती है। पीछे यही धार फैलकर जी में घड़ी-घड़ी लहरें उठाती है। ऐसे ही हमारी चाहों, ईच्छाओं का सिलसिला बढता रहता है…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

तक…

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कभी कभी हमें बहुत विचित्र सी अनुभूति होती है। पता नहीं लेकिन अनायास ही कुछ ऐसे संकेत हमारे मन मष्तिष्क मे उभरते है जीसका तात्कालीन कोई संदर्भ समझ में नहीं आता। यह हमारे अंतर्मन कि शक्ति का प्रदर्शन होता है। जब हमारा मन अंतर्मन की अनसुनी करता है तब अंतर्मन कि बौखलाहट ईस तरह प्रस्तुत करता है। हमें अक्सर ऐसा अहसास होता है कि जो खेल हम खेल नहीं पाए उसे अगर हम खेल लेते तो आज जीत चुके होते…..जय श्री कृष्ण

▁ ▂ ▅ आपका दिन शुभ हो ▅ ▂ ▁ ।।।। ıllıllı शैलेष पटेल ıllıllı ।।।।

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